ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- Suresh Gorana
- Sep 8, 2022
- 2 min read
श्रीमद्भागवत-महापुराण का पारायण श्री दिलीपभाई गोराना द्वारा संपूर्ण श्रध्धा और भक्तिभाव से ईस पुरुसोत्तम मास (18 सितंबर से 17 अक्तुबर 2020) के पावन समय और कोरोना महामारी की विश्वव्यापी गंभीर विपदाओं के बीच SCA Vatika में एकमात्र श्रोता कु. ईन्दुबेन गोराना के समक्ष करना ठीक वैसे रहा जैसे भगवान श्रीकृष्ण का भीषण युध्ध स्थली कुरुक्षेत्र के बीच सिर्फ अर्जुन को गीता उपदेश का सुनाना था।
श्रीमद्भागवत-महापुराण में हमें कलियुग में हर परिस्थितिओं में जीने के उत्तम मार्ग सीखने को मिलते है। सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग हमारे लिए सिर्फ़ कथाओं तक ही सीमित है।
कलियुग में सुखी जीवन का एकमात्र रास्ता कर्म यानि श्रम ही है।
कोरोना महामारी से छुटकारा पाना स्वयं के ही हाथों में है और कर्म एकमात्र अक्सीर ईलाज है।
।। श्रम, श्रद्धा और सादगी ही जीवन है।।

यह तस्वीर के दोनों सुत्रों को आत्ममंथन और आत्मचिंतन से ही समझ सकते है जो कि श्रीमद्भागवत-महापुराण का अत्यंत संक्षित में निष्कर्ष है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏
श्रीमद्भागवत-महापुराण is truly priceless treasures of practical knowledge to practice in life by everyone, and more so how to make world A better place for generations to come sooner when we win the battle against COVID-19 pandemic.
Lucky that I first time ever in life not only listening but churning out few gems and that I am sharing here with all my beloved family, relatives, and friends.
There shall be complete full length movie (to be released in parts in my subsequent blogs here) on entire discourses by Dilip Gorana at SCA VATIKA where Indu Gorana and myself are only two listeners, (like Lord Krishna spoke GITA only to Arjuna and not to great and mammoth armies standing in middle of the battlefield of Kurukshetra) spanning entire Purushottam Month from 18th September to 17th October 2020.
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏
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